Ad

Fasal Beema Yojana

इस राज्य में बारिश और ओलावृष्टि से ग्रसित किसानों को मिलेगी 15 हजार रूपए एकड़ के हिसाब से सहायक धनराशि

इस राज्य में बारिश और ओलावृष्टि से ग्रसित किसानों को मिलेगी 15 हजार रूपए एकड़ के हिसाब से सहायक धनराशि

पंजाब राज्य में बेमौसम बारिश होने की वजह से सर्वाधिक हानि गेहूं की फसल को हुई है। अब ऐसी स्थिति में यहां के किसान भाइयों को प्राकृतिक आपदा से संरक्षण देने के लिए शीघ्र ही सरकार की ओर से फसल बीमा योजना जारी की जाएगी। पंजाब में अचानक बारिश और ओलावृष्टि से लाखों हेक्टेयर में लगी गेहूं की फसल चौपट हो गई है। जिसकी वजह से किसानों को प्रचंड आर्थिक हानि पहुंची है। परंतु, इसी कड़ी में राज्य के किसानों हेतु एक राहत भरा समाचार सुनने को मिला है। मुख्यमंत्री भगवंत मान जी ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्त हुई फसल को लेकर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने बताया है, कि जिन किसानों की फसल वर्षा और ओलावृष्टि से नष्ट हुई है, उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, निरंतर आ रही फसल बर्बादी के समाचारों के मध्य सीएम मान ने रविवार को वर्षा से प्रभावित हुए जनपदों का दौरा किया। मुख्यमंत्री भगवंत मान जी ने बठिंडा, पटियाला, मुक्तसर और मोगा जनपद में जाकर प्रभावित किसानों का हाल चाल जाना। विशेष बात यह है, कि इन चारों जनपदों में ही सर्वाधिक गेहूं की फसल को हानि पहुंची है। बहुत सारे जनपदों में तो 70 प्रतिशत से भी अधिक फसलों की तबाही हुई है। बारिश सहित तीव्र हवा चलने की वजह से गेहूं की फसल खेत में गिर पड़ी है। फिलहाल, किसानों को इस गिरी हुई गेंहू की फसल की कटाई करने में बेहद परेशानी होगी।

किसानों की हजारों एकड़ फसल हुई बर्बाद

सीएम मान ने मीडिया के माध्यम से बताया है, कि बेमौसम बारिश से राज्य के किसानों को बेहद हानि हुई है। ऐसे में वे किसानों के दर्द को भली भाँति समझ सकते हैं। उन्होंने कहा है, कि निरीक्षण के उपरांत आई प्रारंभिक रिपोर्ट से पता चलता है, कि हजारों एकड़ में लगी फसल नष्ट हुई है। ये भी पढ़े: सर्दी में पाला, शीतलहर व ओलावृष्टि से ऐसे बचाएं गेहूं की फसल

घर के हानि होने की स्थिति में 95,100 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया है, कि जिन किसानों की 75 फीसद फसल नष्ट हो चुकी है। उन किसानों को 15 हजार रुपयए प्रति एकड़ के भाव से सहायता धनराशि दी जाएगी। साथ ही, जिन किसान भाइयों की फसल में हानि 33 से 75 प्रतिशत के मध्य हुई है, उनको 6750 रुपये प्रति एकड़ के भाव से सहायता धनराशि प्रदान की जाएगी। साथ ही, मजदूरों को घर के नुकसान होने पर 95,100 रुपये की सहायक धनराशि प्रदान की जाएगी।

केंद्र सरकार द्वारा जारी फसल बीमा योजना कागजों तक ही सीमित : भगवंत मान

बतादें, कि पंजाब राज्य में बेमौसम बारिश की वजह से सर्वाधिक गेहूं की फसल को हानि हुई है। अब ऐसी स्थिति में यहां के किसान भाइयों को प्राकृतिक आपदा से संरक्षण देने के लिए अतिशीघ्र ही सरकार के माध्यम से फसल बीमा योजना चालू की जाएगी। सीएम मान के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा चल रही फसल बीमा योजना से किसानों को कोई भी फायदा नहीं होने वाला है। वह केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है। यही कारण है, कि पंजाब सरकार के लिए किसानों और मजदूरों का विकास पहली प्राथमिकता है।
केंद्र सरकार की तरफ से चलाई जा रहीं इन तीन योजनाओं से किसानों को आर्थिक लाभ मिलता है

केंद्र सरकार की तरफ से चलाई जा रहीं इन तीन योजनाओं से किसानों को आर्थिक लाभ मिलता है

केंद्र सरकार की तरफ से किसानों के फायदे के लिए बहुत सारी योजनाएं चल रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक तौर पर किसानों का विकास करने के साथ-साथ खेती किसानी के दौरान आने वाली चुनौतियों को भी दूर करना है। कृषकों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के जरिए किसानों को विभिन्न तरह का सहयोग मिलता है। आइए जानते हैं, वह कौन सी योजनाएं हैं जो किसानों की आर्थिक तौर पर सहयोग करती हैं। इसके साथ ही खेती से संबंधित बाकी कार्यों में भी सहायता करती हैं।

पीएम किसान सम्मान निधि योजना

पीएम किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत भारत के कृषक भाइयों को हर एक वर्ष में 6 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। इस योजना के अंतर्गत किसानों को चार किस्तों में ये रुपये हस्तांतरित किए जाते हैं। मतलब कि ये धनराशि कृषकों को 2-2 हजार रुपये की तीन अलग-अलग किस्तों में उपलब्ध कराई जाती है। अगर आप इस योजना का फायदा उठाना चाहते हैं, तो आप आवेदन करने के दौरान बिल्कुल भी गलती ना करें। योजना से संबंधित अत्यधिक जानकारी के लिए किसान भाई पीएम किसान योजना के हेल्पलाइन नंबर 155261 या 1800115526 अथवा फिर 011-23381092 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें:
पीएम किसान सम्मान निधि योजना की लिस्ट से 81000 अपात्र किसानों का नाम कटा

पीएम किसान मानधन योजना

केंद्र सरकार द्वारा जारी पीएम किसान मानधन योजना के अंतर्गत सरकार प्रति माह किसानों को 3 हजार रुपये की पेंशन प्रदान कर रही है। इस योजना का फायदा प्राप्त करने के लिए आवेदन करने के लिए केवल 18 से 40 साल के किसान ही पात्र हैं। जब किसानों की आयु 60 साल हो जाती है, तो उसके उपरांत उनके अकाउंट में तीन हजार रुपये प्रति महीने पेंशन भेजी जाती है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं, कीटों एवं बीमारियों की वजह से फसल की क्षति के विरुद्ध किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जाती है। योजना के तहत किसान भाइयों को प्रीमियम का भुगतान करना होता है, जिस पर सरकार सब्सिडी देती है। केंद्र व राज्य सरकार में गैर-सब्सिडी वाली फसलों के लिए 50:50 के अनुपात में प्रीमियम सब्सिडी साझा करती हैं। वहीं, सब्सिडी वाली फसलों के लिए केंद्र सरकार उच्च सब्सिडी हिस्सेदारी प्रदान करती है।
अब उत्तर प्रदेश के आम उत्पादकों को प्राकृतिक आपदाओं की क्षतिपूर्ति भी मिलेगी

अब उत्तर प्रदेश के आम उत्पादकों को प्राकृतिक आपदाओं की क्षतिपूर्ति भी मिलेगी

जैसा कि हम सब जानते हैं, कि विश्व के समस्त देशों में आम का स्वाद समाया हुआ है। अब से कुछ ही दिनों की समयावधि में आम के बागों में बौर आना प्रारंभ हो जाएगा। बागवान बागों की साफ सफाई एवं सिंचाई के लिए जुट गए हैं। बौर आने से लगाकर फसल बिकने तक आंधी तूफान एवं ओलों जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करती है। इसमें आम की फसल काफी बुरी तरह से चौपट हो जाती है। आम की फसल से लोगों का मुंह मीठा करने वाले बागवानों की फसल को भी वर्तमान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच प्रदान किया जाएगा। जिला प्रशासन ने फसल बीमा योजना के अंतर्गत पहली बार आम की फसल को भी सम्मिलित कर लिया है। अगर अब बीमित फसल को कोई हानि होती है, तो बीमा कंपनी द्वारा किसानों को क्षतिपूर्ति धनराशि प्रदान की जाएगी। गन्ने की फसल के लिए प्रसिद्ध जनपद में आम की फसल भी खूब लहलहाती है। जनपद में तकरीबन साढ़े नौ हजार हेक्टेयर भूमि में आम के बाग लगे हुए हैं। दशहरी, बनारसी और चौसा आम की प्रमुख प्रजातियां जनपद में हैं। इसके अतिरिक्त कुछ बागों में आमृपाली एवं रटौल के पेड़ भी लगे हुए हैं।

पीएम फसल बीमा योजना के तहत मिलेगा फायदा 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बहुत वर्षों से चल रही है। परंतु, आम की फसल अब तक इससे बाहर थी। भले ही कितनी भी क्षति हो जाए, परंतु आम की फसल को बीमा योजना से एक रुपये की भी क्षतिपूर्ति नहीं मिलती थी। बतादें, कि किसी फसल को बीमा योजना में सम्मिलित करना डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय मानीटरिंग समिति के अधिकार में होता है।

ये भी पढ़ें:
PMFBY: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसान संग बीमा कंपनियों का हुआ कितना भला? बतादें, कि इस समिति ने आम की फसल को भी जनपद के अंदर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सम्मिलित कर लिया है। बीमित फसल में अब यदि आंधी-तूफान अथवा ओलावृष्टि से कोई हानि होती है, तो बीमा कंपनी द्वारा इसकी क्षतिपूर्ति की जाएगी।

आम उत्पादन से 70 हजार रुपये हैक्टेयर तक आय होती है 

आम की फसल से औसत उत्पादन 70 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक माना गया है। इस धनराशि का पांच फीसद मतलब कि तकरीबन साढ़े तीन हजार रुपये देकर आम के बाग का बीमा होगा। आंधी-तूफान अथवा ओलावृष्टि से क्षतिपूर्ति केवल उन्हीं कृषकों को प्रदान की जाएगी जो फसल का बीमा कराऐंगे।

आम की खेप सऊदी अरब तक जाती है

बिजनौर का आम सऊदी अरब तक जाता है। आम की फसल को विदेश भेजने के लिए फसल की गुणवत्ता काफी उत्तम होनी चाहिए। परंतु, हद से ज्यादा बारिश भी फसल को काफी नुकसान पहुंचाती है। इस बार ज्यादा वर्षा होने से आम की फसल पर काले धब्बे पड़ गए। साथ ही, फसल विदेश भेजने योग्य ही नहीं बची। 'आम की फसल को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सम्मिलित किया गया है। बीमित फसल में कोई हानि होने पर संबंधित कंपनी से क्षतिपूर्ति दिलाई जाएगी। किसानों को आम की फसल का बीमा कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है।' जितेंद्र कुमार, जिला उद्यान अधिकारी बिजनौर उत्तर प्रदेश।